नई दिल्ली। ईरान में जारी संघर्ष के बीच भारत में लॉकडाउन को लेकर तरह-तरह की चर्चा हो रही है। इसके पीछे तर्क दिया जा रहा है कि देश में ईंधन की कमी के चलते केंद्र सरकार इस तरह का फैसला ले सकती है। हालांकि, सरकार ने बार-बार ऐसी किसी भी संभावना को सिरे से खारिज कर दिया है। इस बीच, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने शुक्रवार को कहा कि एलपीजी सिलेंडर या ईंधन की कोई कमी नहीं है और भू-राजनीतिक तनाव के कारण वैश्विक तेल की कीमतों में उछाल के बावजूद भारत आपूर्ति तथा कीमतों को बनाए रखने में कामयाब रहा है।
मोदी सरकार पर भरोसा रखने का आग्रह करते हुए अमित शाह ने कहा कि जब दुनिया भर में खुदरा कीमतें बढ़ रही हैं, तब भारत एकमात्र ऐसा देश है जहां पेट्रोल और डीजल की कीमतों में वृद्धि नहीं हुई है। टाइम्स नाउ समिट के साथ एक इंटरव्यू के दौरान अमित शाह ने कहा कि प्रधानमंत्री ने आश्वासन दिया है कि लॉकडाउन नहीं होगा।
उन्होंने कहा, ”हम देश में सामान्य कामकाज जारी रखते हुए निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित कर रहे हैं।” उन्होंने कहा कि भारत पहले 27 देशों से ईंधन आयात करता था, लेकिन अब वह 42 देशों से आयात करता है।
इससे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को कहा कि पश्चिम एशिया संघर्ष से उत्पन्न वैश्विक स्थिति गतिशील बनी हुई है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि आर्थिक और व्यापारिक स्थिरता बनाए रखना, ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करना, उद्योग एवं आपूर्ति श्रृंखलाओं को मजबूत करना तथा नागरिकों के हितों की रक्षा करना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताएं हैं।
मुख्यमंत्रियों के साथ डिजिटल माध्यम से बैठक की अध्यक्षता करते हुए मोदी ने कहा कि स्थिति के लिए निरंतर निगरानी और अनुकूल रणनीतियों की आवश्यकता है। उन्होंने केंद्र और राज्यों के बीच निरंतर संचार और समन्वय के साथ-साथ समय पर सूचनाओं के आदान-प्रदान एवं संयुक्त निर्णय लेने का आह्वान किया, ताकि प्रतिक्रियाएं त्वरित और सुव्यवस्थित हों।
मुख्यमंत्रियों से आपूर्ति श्रृंखलाओं के सुचारू संचालन को सुनिश्चित करने और जमाखोरी और मुनाफाखोरी के खिलाफ सख्त उपाय करने का आग्रह करते हुए मोदी ने गलत सूचनाओं और अफवाहों के प्रसार के खिलाफ चेतावनी दी। उन्होंने इस पर भी जोर दिया कि सटीक और विश्वसनीय जानकारी का समय पर प्रसार आवश्यक है।
पश्चिम एशिया की स्थिति का जिक्र करते हुए बैठक में प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत को इसी तरह की वैश्विक बाधाओं से निपटने का पूर्व अनुभव है और उन्होंने कोविड-19 महामारी के दौरान की गई सामूहिक प्रतिक्रिया को याद किया, जब केंद्र और राज्यों ने आपूर्ति श्रृंखलाओं, व्यापार और दैनिक जीवन पर पड़ने वाले प्रभावों को कम करने के लिए ‘टीम इंडिया’ के तौर पर साथ मिलकर काम किया था। मोदी ने कहा कि सहयोग और समन्वय की यही भावना वर्तमान स्थिति से निपटने में भारत की सबसे बड़ी ताकत बनी हुई है।
बैठक में भाग लेने वाले मुख्यमंत्रियों में एन चंद्र बाबू नायडू (आंध्र प्रदेश), योगी आदित्यनाथ (उत्तर प्रदेश), रेवंत रेड्डी (तेलंगाना), भगवंत मान (पंजाब), भूपेन्द्र पटेल (गुजरात), उमर अब्दुल्ला (जम्मू कश्मीर), सुखविंदर सिंह सुक्खू (हिमाचल प्रदेश) और पेमा खांडू (अरुणाचल प्रदेश) समेत अन्य थे। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और गृह मंत्री अमित शाह भी मौजूद रहे।
यह पहली बार था जब प्रधानमंत्री ने पश्चिम एशिया संघर्ष पर मुख्यमंत्रियों के साथ बैठक की। यह संघर्ष 28 फरवरी को अमेरिका-इज़राइल द्वारा ईरान पर हमलों से शुरू हुआ था, जिसके जवाब में तेहरान ने अपने खाड़ी पड़ोसियों और इजरायल पर हमले किए।


