साईखेड़ा | तूमड़ा क्षेत्र के अंतर्गत आने वाली शुगर मिल–तूमड़ा–साईखेड़ा सड़क आज अपनी बदहाली पर आंसू बहा रही है। लाखों की लागत से बनी यह सड़क पूरी तरह उखड़ चुकी है, जिससे राहगीरों और ग्रामीणों का पैदल चलना भी दूभर हो गया है। हैरानी की बात यह है कि शिकायतों के बाद जब मरम्मत शुरू हुई, तो गुणवत्ता की धज्जियां उड़ाते हुए सड़क पर महज सीमेंट का पतला घोल पोतकर खानापूर्ति की जा रही है। इससे आक्रोशित ग्रामीणों ने अब शासन-प्रशासन के विरुद्ध मोर्चा खोल दिया है।
जिम्मेदार मौन, ठेकेदार की मनमानी चरम पर ग्रामीणों का आरोप है कि लोक निर्माण विभाग (PWD) के अधिकारियों और ठेकेदार की मिलीभगत के कारण सड़क का निर्माण और मरम्मत कार्य घटिया स्तर का हो रहा है। सड़क की गिट्टियां बाहर निकल आई हैं और बड़े-बड़े गड्ढे दुर्घटनाओं को निमंत्रण दे रहे हैं। ग्रामीणों ने जिला कलेक्टर, PWD विभाग और CM हेल्पलाइन तक गुहार लगाई, लेकिन नतीजा ‘सिफर’ रहा। आरोप है कि संबंधित ठेकेदार अपनी रसूख के दम पर मनमानी कर रहा है और जिम्मेदार अधिकारी आंखें मूंदकर बैठे हैं।
CM हेल्पलाइन पर शिकायत दबाने का षड्यंत्र क्षेत्र के जागरूक नागरिक स्वदेश त्रिवेदी ने बताया कि उन्होंने इस समस्या को लेकर CM हेल्पलाइन पर शिकायत दर्ज कराई थी। त्रिवेदी का आरोप है कि विभाग द्वारा उन पर शिकायत वापस लेने का दबाव बनाया गया। जब उन्होंने समझौता नहीं किया, तो षड्यंत्र के तहत ठेकेदार को एक फर्जी पत्र जारी कर मामला रफा-दफा करने की कोशिश की गई। उन्होंने कहा, “सात दिन की चेतावनी के बाद चार महीने बीत गए, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। ऐसा लगता है कि प्रशासन जानबूझकर ‘गारंटी पीरियड’ समाप्त होने का इंतजार कर रहा है ताकि ठेकेदार को बचाया जा सके।”
न्यायालय की शरण में जाएंगे ग्रामीण, जाम होगा स्टेट हाईवे वहीं, सुरेन्द्र सिंह राजपूत ने प्रशासन को दोटूक चेतावनी देते हुए कहा कि अब शिकायतों का समय निकल चुका है। प्रशासनिक उदासीनता से तंग आकर ग्रामीण अब न्यायालय की शरण में जाने की तैयारी कर रहे हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि शीघ्र ही गुणवत्तापूर्ण सड़क का निर्माण नहीं हुआ, तो क्षेत्र की जनता स्टेट हाईवे पर चक्काजाम और उग्र प्रदर्शन करेगी, जिसकी समस्त जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।


