बरनाला: 7 मई (परमजीत सिंह कैरे)
पंजाब के मेहनतकश वर्ग की जायज मांगों के प्रति सरकार की कथित बेरुखी और नीतिगत देरी के विरोध में नगर निगम बरनाला में शुरू किया गया ‘पक्का मोर्चा’ आज दूसरे दिन एक विशाल जन-सैलाब में तब्दील हो गया। शहर की सफाई व्यवस्था को पूरी तरह ठप कर मजदूरों ने प्रशासनिक गलियारों तक अपनी आवाज पहुंचाने का लोकतांत्रिक प्रयास किया। अत्यंत खेद का विषय रहा कि संघर्ष के दूसरे दिन भी शासन या प्रशासन का कोई जिम्मेदार अधिकारी मजदूरों की संवैधानिक मांगों पर चर्चा करने के लिए नहीं पहुंचा, जिससे प्रदर्शनकारियों में भारी रोष व्याप्त है।
नेताओं की ललकार: “वादों की जगह अब वफादारी की जरूरत”
धरने को संबोधित करते हुए विभिन्न कर्मचारी संगठनों के नेताओं ने सरकार को आड़े हाथों लिया। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में हर नागरिक को अपनी मेहनत का उचित मूल्य पाने का संवैधानिक अधिकार है। सरकार ने चुनाव के दौरान ‘मजदूरों के कल्याण’ के जो वादे किए थे, आज वे केवल खोखले शब्द बनकर रह गए हैं। हम सड़कों पर बैठने के शौकीन नहीं हैं, बल्कि अपने परिवारों की रोटी और आत्म-सम्मान की रक्षा के लिए मजबूर हैं। जब तक लिखित फैसला नहीं होता, यह जंग जारी रहेगी।
प्रशासनिक अधिकारियों की अनदेखी पर तीखा हमला करते हुए नेताओं ने कहा कि हम शहर की सुंदरता के लिए अपना पसीना बहाते हैं, लेकिन जब हमारे हक की बात आती है तो निजाम चुप्पी साध लेता है। कच्चे कर्मचारियों को पक्का करने का नोटिफिकेशन हमारा मौलिक अधिकार है और इसे हासिल किए बिना हम पीछे नहीं हटेंगे।
दिव्यांग कर्मचारियों की व्यथा: “10 हजार में कैसे पालें परिवार?”
मोर्चे में विशेष रूप से पहुंचे दिव्यांग कर्मचारियों ने अपना दुख व्यक्त करते हुए बताया कि वे लुधियाना, बठिंडा, मानसा और अमृतसर जैसे दूर-दराज के इलाकों से यहां आकर पूरी ईमानदारी से सेवा दे रहे हैं। उन्होंने कहा, “सरकार हमें महज 10 हजार रुपये मासिक वेतन दे रही है, जिसमें से 5 से 6 हजार रुपये तो केवल कमरे के किराए में चले जाते हैं। राशन के लिए हमें आज भी अपने घरों से पैसे मंगवाने पड़ते हैं। हम सिर्फ इस उम्मीद में दिन काट रहे हैं कि शायद सरकार हमें पक्का कर दे। यदि सरकार हमें पक्का नहीं कर सकती, तो कम से कम हमारा तबादला हमारे गृह जिलों में कर दिया जाए।”
भारी समर्थन और एकजुटता
आज के इस मोर्चे में विभिन्न यूनियनों के पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं ने बड़ी संख्या में शिरकत कर मजदूर एकता का परिचय दिया। इस अवसर पर करमजीत सिंह बीहला, दर्शन सिंह चीमा, अनिल कुमार, अंगद प्रताप, जसबीर सिंह, जगतार सिंह विक्की, अशोक कुमार (पूर्व प्रधान) और अशोक कुमार सहित अनेक नेताओं ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई।
इसके साथ ही राष्ट्रीय सफाई कर्मचारी महासंघ (भारत) की टीम और नगर निगम कर्मचारी दल के प्रतिनिधियों ने भी मोर्चे को मजबूती दी। उपस्थित होने वालों में राम सिंह, जसवंत कुमार, राज कुमार राजू, विक्की सहोता, कुलविंदर सिंह, अजय कुमार मोगली, करण वीर राजू, साहिल कुमार, राजू दीपू, विक्की सारसवान, बलजिंदर सिंह फाजिल्का, जसवंत सिंह बठिंडा, मनप्रीत सिंह अमृतसर, राजवीर कौर मानसा, चरणजीत कुमार लुधियाना और खुशहाल चंद फाजिल्का मुख्य थे। इसके अलावा विनय कुमार, राजू ढोली, संजय कुमार, रणवीर सिंह, अवतार सिंह, बलजीत सिंह, विक्की, विनोद कुमार, नीला सिंह, बिट्टू कुमार, जॉनसन जॉनी और रवि रावण भी मौजूद रहे।
नारी शक्ति का हुंकार और भविष्य की रणनीति
इस्त्री विंग की प्रधान बिंदु रानी के नेतृत्व में मूर्ति देवी, संतोष रानी और सरोज रानी सहित बड़ी संख्या में महिलाओं ने पंजाब सरकार के खिलाफ जोरदार नारेबाजी की। समूह नेताओं ने सर्वसम्मति से निर्णय लिया कि यदि सरकार ने तुरंत कोई सार्थक कदम नहीं उठाया, तो यह ‘काम-बंद’ हड़ताल अनिश्चितकालीन समय के लिए जारी रहेगी। इस बढ़ते जनाक्रोश की पूरी जिम्मेदारी स्थानीय प्रशासन और पंजाब सरकार की होगी।


