देश ने खोई लोककला की अमूल्य धरोहर: पद्म विभूषण पंडवानी सम्राज्ञी तीजन बाई का निधन
रायपुर/छत्तीसगढ़ | रविवार, 5 जुलाई 2026
भारतीय लोककला जगत के लिए रविवार का दिन शोकपूर्ण रहा। छत्तीसगढ़ की लोकसंस्कृति को विश्व मंच पर नई पहचान दिलाने वाली पद्म विभूषण से सम्मानित प्रख्यात पंडवानी गायिका तीजन बाई का रविवार को रायपुर स्थित एम्स में निधन हो गया। वे लंबे समय से अस्वस्थ थीं और अस्पताल में उपचाराधीन थीं। उनके निधन से भारतीय लोकसंगीत और लोकनाट्य की एक गौरवशाली परंपरा का महत्वपूर्ण अध्याय समाप्त हो गया।
दुर्ग जिले के पाटन विकासखंड के अटारी गांव से निकलकर विश्वभर में अपनी कला का परचम लहराने वाली तीजन बाई ने पंडवानी गायन को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया। महाभारत की कथाओं को अपनी ओजस्वी वाणी, प्रभावशाली अभिनय और भावपूर्ण प्रस्तुति के माध्यम से उन्होंने जिस जीवंत शैली में प्रस्तुत किया, उसने देश-विदेश के लाखों दर्शकों को मंत्रमुग्ध किया। उन्होंने यूरोप, अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी, जापान, ऑस्ट्रेलिया सहित अनेक देशों में प्रस्तुति देकर भारतीय लोककला और छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक विरासत को वैश्विक पहचान दिलाई।
लोककला के क्षेत्र में उनके अद्वितीय योगदान के लिए भारत सरकार ने उन्हें 1988 में पद्मश्री, 2003 में पद्म भूषण तथा 2019 में पद्म विभूषण से सम्मानित किया। इसके अलावा उन्हें संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार, नृत्य शिरोमणि, कला शिरोमणि सहित अनेक राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय सम्मानों से अलंकृत किया गया।
तीजन बाई ने सामाजिक रूढ़ियों को चुनौती देते हुए पंडवानी की कपालिक शैली को नई पहचान दी और महिला कलाकारों के लिए नई राह प्रशस्त की। संघर्ष, साधना और समर्पण से भरा उनका जीवन भारतीय लोककला के इतिहास में सदैव प्रेरणास्रोत बना रहेगा।
उनके निधन पर राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, विभिन्न राज्यों के मुख्यमंत्री, कला, साहित्य, संगीत, रंगमंच और संस्कृति जगत की अनेक हस्तियों ने गहरा शोक व्यक्त करते हुए उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। उनके निधन को भारतीय लोककला की अपूरणीय क्षति बताया जा रहा है।
“तीजन बाई का स्वर भले ही मौन हो गया हो, लेकिन उनकी कला, उनकी साधना और उनकी सांस्कृतिक विरासत सदैव अमर रहेगी।”
— संवाददाता: तुलसी साहू
दिल्ली क्राइम प्रेस नेशनल न्यूज़


