
पत्नी जिंदगी और मौत के बीच जूझ रही; बिजली विभाग की लापरवाही पर उठे गंभीर सवाल
बलौदाबाजार ( छत्तीसगढ़ )7 नवंबर 2026
दिवाली का त्योहार खुशियों, रोशनी और अपनों के साथ जश्न मनाने का पर्व है। हर घर में दीप जल रहे थे, परिवारों में खुशियां बांटी जा रही थीं और लोग त्योहार की उमंग में डूबे हुए थे। लेकिन इसी खुशियों के माहौल के बीच बलौदाबाजार के एक परिवार पर ऐसा दुखों का पहाड़ टूटा कि उसकी खुशियां हमेशा के लिए मातम में बदल गईं। घर के पास से गुजर रहे मौत के हाईटेंशन तार ने एक ही परिवार के दो सदस्यों की जिंदगी छीन ली। इस हृदयविदारक हादसे में राकेश गुप्ता और उनके जवान बेटे ओम गुप्ता की दर्दनाक मौत हो गई, जबकि राकेश गुप्ता की पत्नी गंभीर रूप से झुलसकर जिंदगी और मौत के बीच संघर्ष कर रही हैं। उनका रायपुर में उपचार जारी है।
जिस घर में दिवाली पर दीपों की रोशनी और अपनों की हंसी गूंजनी थी, वहां अब चीख-पुकार और अपनों को खोने का असहनीय दर्द पसरा हुआ है। पिता-पुत्र की एक साथ मौत की खबर से पूरे शहर में शोक की लहर दौड़ गई है। हर कोई इस परिवार के साथ हुई त्रासदी से स्तब्ध है। आखिर जिस त्योहार पर लोग अपने घरों को रोशन कर रहे थे, उसी दौरान एक परिवार के जीवन में ऐसा अंधेरा कैसे छा गया?
घर के करीब मौत बनकर लटक रहा था हाईटेंशन तार
स्थानीय लोगों के मुताबिक, जिस स्थान पर यह हादसा हुआ, वहां आवासीय क्षेत्र के बेहद करीब से हाईटेंशन विद्युत तार गुजर रहा था। आरोप है कि तार काफी नीचे लटका हुआ था और उसकी सुरक्षा के लिए पर्याप्त इंतजाम भी नहीं किए गए थे। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि इस खतरनाक स्थिति को लेकर पहले भी बिजली विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों का ध्यान आकर्षित कराया गया था, लेकिन समय रहते कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।
यदि तार वास्तव में निर्धारित सुरक्षा मानकों के विपरीत लटका हुआ था और इसकी शिकायतें भी विभाग तक पहुंची थीं, तो फिर उसे सुरक्षित करने में देरी क्यों हुई? क्या किसी बड़ी दुर्घटना का इंतजार किया जा रहा था? आज ये सवाल पूरे शहर में उठ रहे हैं।
दो जिंदगियां चली गईं, अब जवाबदेही कौन लेगा
यह घटना केवल एक परिवार की व्यक्तिगत त्रासदी नहीं, बल्कि शहर की विद्युत सुरक्षा व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े करती है। बिजली जैसी संवेदनशील और जानलेवा व्यवस्था में छोटी सी चूक भी किसी की जिंदगी छीन सकती है। ऐसे में विद्युत लाइनों का नियमित निरीक्षण, निर्धारित सुरक्षा दूरी बनाए रखना और आवासीय क्षेत्रों में आवश्यक सुरक्षा उपाय सुनिश्चित करना विभाग की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है।
विद्युत अधिनियम 2003 की धारा 161 के तहत विद्युत दुर्घटनाओं की जांच और निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार रिपोर्ट तैयार करने का प्रावधान है। ऐसे में इस हादसे की निष्पक्ष तकनीकी जांच कराई जानी चाहिए, ताकि दुर्घटना के वास्तविक कारणों और संभावित लापरवाही की जिम्मेदारी स्पष्ट हो सके।
पिता-पुत्र की मौत और महिला के गंभीर रूप से घायल होने की इस घटना ने शहरवासियों एवं व्यापारियों को झकझोर कर रख दिया है। लोगों की मांग है कि मामले की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए, विद्युत सुरक्षा निरीक्षक से तकनीकी जांच कराई जाए और यदि किसी अधिकारी या कर्मचारी की लापरवाही सामने आती है तो उसके विरुद्ध कठोर कार्रवाई की जाए।
साथ ही शहर के उन सभी आवासीय और व्यावसायिक इलाकों का विद्युत सुरक्षा ऑडिट कराया जाए, जहां घरों और दुकानों के नजदीक से हाईटेंशन लाइन गुजर रही है। असुरक्षित तारों को तत्काल सुरक्षित किया जाए, ताकि भविष्य में किसी दूसरे परिवार को इस तरह की असहनीय पीड़ा से न गुजरना पड़े।
दिवाली के दीप तो हर साल जलेंगे, लेकिन राकेश गुप्ता के परिवार में इस बार जो अंधेरा छाया है, उसकी भरपाई कभी नहीं हो सकेगी। दो जिंदगियां खत्म हो गईं और एक जिंदगी अस्पताल में संघर्ष कर रही है। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या इस हादसे के बाद जिम्मेदार विभाग जागेगा, या फिर किसी और परिवार की खुशियां उजड़ने के बाद ही कार्रवाई होगी?
संवाददाता तुलसी साहू
दिल्ली क्राइम नेशनल न्यूज


