भिक्कावाला में संघर्ष समिति की बैठक, जनजागरण अभियान चलाने और 19 जुलाई को अगली रणनीति तय करने का निर्णय।
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अफजलगढ़। उत्तराखंड की सीमा से सटे उत्तर प्रदेश के 125 ग्राम पंचायतों के 285 गांवों तथा नगर पंचायत बढ़ापुर को उत्तराखंड में शामिल किए जाने की मांग एक बार फिर जोर पकड़ने लगी है। इसी क्रम में उत्तराखंड संघर्ष समिति की एक महत्वपूर्ण बैठक रविवार को ग्राम भिक्कावाला स्थित शिव मंदिर परिसर में आयोजित की गई। बैठक में संघर्ष समिति के संयोजक मनमोहन दूतपुडी के नेतृत्व में पहुंची टीम ने क्षेत्र के लोगों के साथ विस्तृत विचार-विमर्श किया। कार्यक्रम में क्षेत्र के गणमान्य नागरिकों, पूर्व सैनिकों, युवाओं तथा ग्रामीणों ने बढ़-चढ़कर भाग लिया। इस दौरान सीमावर्ती क्षेत्रों की समस्याओं, विकास कार्यों तथा भविष्य की रणनीति पर विस्तार से चर्चा की गई।
संयोजक मनमोहन दूतपुडी ने शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क, बिजली, रोजगार, कृषि तथा अन्य जनहित से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठाया। उन्होंने कहा कि सीमावर्ती गांवों को उत्तराखंड में शामिल करने की मांग केवल प्रशासनिक सीमाओं का विषय नहीं, बल्कि क्षेत्र के विकास, पहचान और जनहित से जुड़ा मुद्दा है। उन्होंने कहा कि इस संबंध में स्थानीय जनता की राय को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाएगी तथा जनजागरण अभियान और जनमत संग्रह के माध्यम से लोगों की भावनाओं को एकत्रित किया जाएगा। बैठक में वक्ताओं ने क्षेत्र के विकास और समस्याओं के समाधान के लिए एकजुट होकर कार्य करने का संकल्प लिया। साथ ही अधिक से अधिक लोगों को इस आंदोलन से जोड़ने के लिए व्यापक जनसंपर्क अभियान चलाने का निर्णय भी लिया गया। संघर्ष समिति ने स्पष्ट किया कि क्षेत्र के विकास, मूलभूत सुविधाओं की उपलब्धता और जनभावनाओं के सम्मान को ध्यान में रखते हुए आगे की रणनीति तय की जाएगी। संयोजक मनमोहन दूतपुडी ने बताया कि आगामी 19 जुलाई को ग्राम भिक्कावाला स्थित शिव मंदिर में पुनः बैठक आयोजित की जाएगी,जिसमें आंदोलन की आगामी रूपरेखा पर विचार-विमर्श किया जाएगा। बैठक में प्रीतम सिंह रौतेला,उपेंद्र डोबरियाल,जितेंद्र सिंह,बाबू जोशी,कृष्णा थपलियाल,सुरेंद्र गुसाईं, महिमानंद बर्थवाल,दीपक मयाल,कैलाश थपलियाल, रघुवीर सिंह,गजेंद्र सिंह बिष्ट, सुनील कुमार धस्माना तथा अनिल नेगी सहित बड़ी संख्या में लोग उपस्थित रहे।


